अवैध कब्जे के आरोपों से घिरा हरिहरपुर, नगर निगम और राजस्व विभाग की भूमिका पर प्रश्नचिह्न
संवाददाता राकेश कुमार मिश्रा
लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ लगातार सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन राजधानी लखनऊ के सरोजिनी नगर क्षेत्र के हरिहरपुर में सरकारी भूमि पर कब्जे के मामले थमने का नाम नहीं ले रहा हैं क्षेत्र में तालाब, बंजर तथा गौचर (चारागाह) भूमि पर लगातार अतिक्रमण के आरोप लग रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है और आरोप मे नगर निगम व राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठा रहे हैं सवाल ताजा मामला हरिहरपुर स्थित खसरा संख्या 209 का है जानकारी के अनुसार लगभग एक वर्ष पूर्व नगर निगम के कुछ अधिकारियों द्वारा पैमाइश कराकर उक्त भूमि को सरकारी भूमि घोषित करते हुए वहां बोर्ड लगाया गया था अब आरोप है कि कुछ दबंगों ने नगर निगम का बोर्ड हटाकर बाउंड्री वॉल का निर्माण शुरू कर दिया और भूमि पर कब्जे का प्रयास किया जा रहा है वहीं क्षेत्रीय पार्षद बृजमोहन शर्मा का कहना है कि प्रार्थना पत्र के माध्यम से नगर आयुक्त को सूचना दे दी है जल्द से जल्द कार्रवाई होगी और वही नगर निगम के लेखपाल अजीत तिवारी ने बताया कि सूचना मिलने पर वह मौके पर पहुंचे, जहां लगभग 10 से 15 अधिवक्ताओं की मौजूदगी में बाउंड्री का निर्माण कराया जा रहा था उन्होंने निर्माण कार्य रोकने का प्रयास किया, लेकिन कथित रूप से धारा 24 की पैमाइश का हवाला देते हुए उन्हें वहां से भगा दिया गया तथा अभद्रता भी की गई
लेखपाल के अनुसार उन्होंने पूरे मामले की रिपोर्ट एवं वीडियो नायब तहसीलदार राजेंद्र कुमार सिंह सहित उच्च अधिकारियों को उपलब्ध करा दी है अधिकारियों ने मामले की जल्द पैमाइश कराकर सत्यता की जांच करने तथा अवैध निर्माण पाए जाने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है साथ ही दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात भी कही गई है
इस प्रकरण ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं क्षेत्रीय के लोगों का कहना है कि यदि पहले की गई पैमाइश गलत थी तो पूर्व में बनाई गई दीवार क्यों तोड़ी गई और यदि नगर निगम की पैमाइश सही थी तो सरकारी भूमि पर बोर्ड लगाने के बाद अब कब्जे की नौबत क्यों आई ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है




