प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में अमेठी में बड़ा कदम, किसानों को मिले बाजरा मिनीकिट व कृषि यंत्र
रिपोर्टर रिंकी सिंह
अमेठी। किसानों को आत्मनिर्भर, समृद्ध और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से जनपद मुख्यालय गौरीगंज स्थित जिला पंचायत रिसोर्स सेंटर में आयोजित दो दिवसीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला का शुक्रवार को भव्य समापन हुआ। कार्यशाला में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा सरकार द्वारा संचालित किसान हितैषी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल प्रदेश सरकार की महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की राज्यमंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक वैकल्पिक पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज, सुरक्षित पर्यावरण और समृद्ध किसान की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर बढ़ती निर्भरता से जहां भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है, वहीं प्राकृतिक खेती किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन का अवसर प्रदान करती है।
उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित खेती को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है, जिनका लाभ उठाकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत बना सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रभारी मंत्री ने 10 किसानों को बाजरा मिनीकिट वितरित किए तथा कृषि विभाग द्वारा अनुदान पर उपलब्ध कराए गए कृषि यंत्रों की चाबियां लाभार्थियों को सौंपीं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की उत्पादन लागत कम करने, आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध कराने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
भाजपा जिलाध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने किसानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी और कहा कि किसानों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने किसानों से सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की।
जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश अग्रहरि ने कहा कि प्राकृतिक खेती आज की आवश्यकता बन चुकी है। इससे न केवल खेती की लागत कम होती है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलता है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को जन-जन तक पहुंचाने पर बल दिया।
जिलाधिकारी संजय चौहान ने कहा कि प्रशासन किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी और सरल तरीके से उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने किसानों से खरीफ सीजन की तैयारियां समय पर पूरी करने और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुरूप खेती करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के उपरांत प्रभारी मंत्री ने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित विकास प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में केंद्र एवं प्रदेश सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और उपलब्धियों को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया था। उन्होंने प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से आमजन को सरकार की योजनाओं की जानकारी मिलती है और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर प्राप्त होता है।
इस अवसर पर “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान किसानों में नई तकनीकों और प्राकृतिक खेती को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला, जिससे कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद और मजबूत हुई।




