“कथा का अमृत: आत्मिक शांति की ओर एक कदम”

अमेठी जनपद के जामों ब्लॉक मुख्यालय के समीप गोंदीपुर गांव में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन कथा व्यास परम पूज्य श्री मुकेश आनंद जी महाराज ने परीक्षित संवाद के विषय में विस्तार पूर्वक जानकारी दी ।
मनुष्य को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में बदलाव भी आता है।
श्रीमद् भागवत कथा जिस स्थान विशेष पर होती है वह एक प्रकार का तीर्थ स्थल है।
प्रवचन में बताया कि मनुष्य को कथा सुनने अवश्य जाना चाहिए जिससे उसके जीवन में आत्मिक शांति और ईश्वर की अनुभूति होती है ।
श्रीमद् भागवत कथा बताती है कि मनुष्य को अपने शरीर और धन पर घमंड नहीं करना चाहिए।
इस कथा की
मुख्य यजमान तेजभान ओझा व पत्नी श्रीमती पुष्पा ओझा थी।
श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य को संपूर्ण जीवन सुख में व्यतीत करने का मार्ग बताती है ।
सुख हमारे भीतर है बस हम उसका अनुभव नहीं कर पाते । सुख की खान भगवान है।
इसलिए मनुष्य को उनसे नाता जोड़ना होगा ।
परीक्षित ने सुखदेव जी से पूछा कि मरने वाले मनुष्य को क्या करना चाहिए।
इस पर सुखदेव जी ने कहा कि उन्हें भगवान का ध्यान करना चाहिए ।
उसी से मुक्ति प्राप्त होती है ।
उत्तम कोटि का भक्त वही होता है ,जो कभी भी भगवान से कुछ नहीं मांगता ।अतः मनुष्य को नियमित भगवान का भजन करना चाहिए ।
इस मौकेपर सूर्यभान ओझा, राम सूरत ओझा, राम तीरथ ओझा, कृपा शंकर ओझा, और राजकुमार ओझा की अतिरिक्त समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति राजेश दुबे,रवि शंकर तिवारी,तेज बहादुर तिवारी, राजेश सिंह फूलपुर, नवीन तिवारी, कुलदीप तिवारी,व वरिष्ठ संवाददाता अमेठी ओम नारायण मिश्रा भी श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन की कथा में उपस्थित रहे।
जिला संवाददाता
ओम नारायण मिश्रा
अमेठी




