के एन आई में ” नीतिशतक में नैतिक विचार ” विषयक संगोष्ठी आयोजित
सुल्तानपुर । कमला नेहरू भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान संस्थान सुल्तानपुर के संस्कृत विभाग द्वारा ” नीतिशतक में नैतिक विचार ” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में भर्तृहरि के व्यक्तित्व एवं उनके नीतिगत श्लोकों पर विस्तार से चर्चा की गयी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्कृत विभाग की अध्यक्ष वंदना सिंह ने नीतिशतक में वर्णित श्लोकों के माध्यम से बताया कि रंचमात्र ज्ञान से गर्वित जिद्दी मूर्ख व्यक्ति को ब्रह्मा भी प्रसन्न नहीं कर सकते ।’ इन्होंने बताया कि शास्त्रों में भी समस्त व्याधियों को दूर करने की औषधि है परंतु जिद्दी मूर्ख व्यक्ति के लिए कोई उपाय नहीं है। अत: ऐसे लोगों से विद्वत चर्चा-परिचर्चा आदि करने से बचना चाहिए। एक अन्य श्लोक का जिक्र करते हुए वन्दना सिंह नें कहा कि हमें अपने वाणी में मधुरता रखनी चाहिए। कटु वचन से परहेज करना चाहिए क्योंकि गहना, आभूषण आदि वाह्य सुंदरता कभी न कभी नष्ट हो जाते हैं किंतु वाणी रूपी आभूषण कभी नष्ट नहीं होता। विभाग के डॉक्टर सर्वेश कुमार ने बताया कि महाकवि भर्तृहरि जो कभी राजा हुआ करते थे किंतु जब इन्हें संसार और लोगों की कुटिलता का बोध हुआ तो वैराग्य धारण कर लिया। इस क्रम में इन्होंने नीतिशतक, श्रृंगार शतक और वैराग्य शतक नाम से तीन शतक ग्रन्थों की रचना भी की। मुक्तक रूप में निबद्ध नीतिशतक में भर्तृहरि ने विविध श्लोकों के माध्यम से नीति परक बातें कही हैं। इन्होंने एक तरफ जहां मूर्ख निंदा और उसे बचने की बात की है वहीं दूसरी ओर विद्वानों की विशेषता और उसकी महत्ता को भी रेखांकित किया है। इस कार्यक्रम में अभिषेक गुप्ता, दीपिका पाण्डेय, जूली वर्मा, निष्कर्ष, संतोष आदि 35 साथ छात्राओं ने प्रतिभाग किये और अपने विचार भी प्रस्तुत किये। अन्त में वंदना सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया।




