हरिहरपुर में विवादित भूखंड पर चला नगर निगम का बुलडोजर, बाउंड्री ध्वस्त
लखनऊ सरोजिनी नगर क्षेत्र के नीलमथा स्थित हरिहरपुर में विवादित जमीन पर कथित कब्जे को लेकर नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई की। खसरा संख्या 636 की जमीन पर बनाई गई बाउंड्री को नगर निगम की टीम ने जेसीबी की मदद से गिरा दिया। कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारी, नगर निगम कर्मचारी तथा
बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा जानकारी के अनुसार हरिहरपुर क्षेत्र में जमीनों पर कब्जे और विवाद को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में विवादित, तालाब, बंजर तथा सरकारी जमीनों को लेकर भी कई बार विवाद की स्थिति बनी है। इसी क्रम में खसरा संख्या 636 की जमीन का विवाद करीब दो वर्षों से चला आ रहा है। जमीन पर
किसान, आवास विकास तथा नगर निगम की ओर से अलग-अलग दावे किए जाने की बात सामने आई है बताया गया कि नगर निगम द्वारा पूर्व में पैमाइश कराकर उक्त जमीन को चिन्हित किया गया था और करीब एक वर्ष पहले मौके पर बोर्ड भी लगाया गया था। आरोप है कि बाद में बोर्ड को हटाकर जमीन की बिक्री का प्रयास किया गया
तथा विवादित भूमि पर बाउंड्री निर्माण के माध्यम से कब्जे की कोशिश की गई मामले की सूचना मिलने के बाद नगर निगम के नायब तहसीलदार एवं राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। कार्रवाई के दौरान थाना सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस तथा अवध विहार चौकी प्रभारी के नेतृत्व में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो नगर निगम की टीम ने जेसीबी की मदद से खसरा संख्या 636 पर बनाई गई बाउंड्री को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जमीन के स्वामित्व एवं बंटवारे का मामला अभी विवादित है और विधिक प्रक्रिया के तहत इसका निस्तारण होना बाकी है राजस्व विभाग के नायब तहसीलदार ने बताया कि यह मामला विधिक बंटवारे से संबंधित है। जब तक जमीन का विधिवत बंटवारा और स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक किसी भी पक्ष द्वारा मौके पर बाउंड्री अथवा अन्य निर्माण नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति आदेश की अवहेलना करते हुए विवादित जमीन पर निर्माण या कब्जे का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में जमीनों की खरीद-फरोख्त और विवादित संपत्तियों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि खसरा संख्या 636 के स्वामित्व एवं बंटवारे का विवाद कानूनी प्रक्रिया के तहत कब तक सुलझता है



