भोजपुरी संस्कृति के रंग में रंगा लखनऊ, कलाकारों की प्रस्तुतियों पर झूमे दर्शक
लखनऊ। अखिल भारतीय भोजपुरी समाज की ओर से विश्वसरैया प्रेक्षागृह, लोक निर्माण भवन, हजरतगंज में भव्य भोजपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भोजपुरी भाषा, लोक संस्कृति और कला की समृद्ध विरासत की शानदार झलक देखने को मिली। आयोजन में प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों से पहुंचे कलाकारों और गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली के सांसद एवं भोजपुरी अभिनेता-गायक मनोज तिवारी, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, देवरिया विधायक शलभ मणि त्रिपाठी, कुशीनगर विधायक पी.एन. पाठक तथा लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथियों में विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान और महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भोजपुरी कलाकारों की शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं। देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे सैकड़ों कलाकारों ने गायन एवं लोक प्रस्तुतियों के माध्यम से भोजपुरी संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश की। प्रसिद्ध कलाकार मनोज तिवारी, कल्पना पटवारी, गोपाल राय और अवधेश बालेश्वर ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। कलाकारों के गीतों पर प्रेक्षागृह में मौजूद दर्शक झूमते नजर आए और पूरा वातावरण भोजपुरी गीत-संगीत से गूंज उठा।
इस अवसर पर अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभुनाथ राय ने कहा कि भोजपुरी भाषा और संस्कृति की पहचान आज देश की सीमाओं से निकलकर विदेशों तक पहुंच चुकी है। भोजपुरी समाज अपनी भाषा, संस्कृति और लोक परंपराओं को संरक्षित रखने के साथ-साथ उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी समाज से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष हर संभव प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम में शामिल कलाकारों के योगदान की सराहना करते हुए भोजपुरी समाज के राष्ट्रीय महासचिव मनोज सिंह एवं राष्ट्रीय सचिव वेद प्रकाश राय ने कलाकारों को सम्मानित किया। सम्मान समारोह के दौरान कलाकारों और समाज के लोगों में उत्साह देखने को मिला।
आयोजकों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम भोजपुरी भाषा एवं संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं। कार्यक्रम का समापन भोजपुरी संस्कृति और कला को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।



